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( साली से ) फ्पोनी, तुम्हारे माणमे को शतरज् खेलना किसने सिखाया ?
माली-हुजूर, उसको शौक दे, छड़कपन से खेलता है ।
हुस्तआरा--इपतसे पूछो, इस नकशे को हल कर देगा
माली-करू बुरूवा दूँगा हुज्गर !
सिपहश्नारा--इसका भाव्या बड़ा सनचला साछूस होता है। -
हुस्नआरा--हाँ, होगा। हृस शिक्क को जाने दो ।
सिपहआरा--क्यों-क्यें, वाजीजाब ! तुम्दारे चेहरे का रस क्यों
अंदल गया १ ह
- हुस्त जारा -कलछ इसका जवाय टूँगी। न
सिपनआ रा-नहीं, आखिर यताओ तो ? ठुम्त इस वक्त खफा
क्यों हो ५
हुस्त आारा -यह मिरजा हुसाझूँ फ़र फी शरारत है ।
सिपलझारा-ओफ ओह, ! यह हश्नकंडे! :

ण८४ आजाद-ऊंथेा
हुस्तआरा-/(सालो से) सच संच बता, यह हुमायूँ कौन है | खबरदा
जो भूठ बोला ! |
सिपहआरा--भाज्जा है तेरो ? पं
मालो--हुजूर ' हुजूर !'!
हुस्तआरा--हुजू२-हुजूर लूगाई हे, बताता नहीं । तेरा सॉब्जा भ्रो
यह नकशे बनाए १ ' 7
भाली- -हुजूर, में माली नहीं हूँ, जाति का कायथ हूँ, मगर घर-बार
छोड़कर बागवानी करने रूगा | हमारा साज्ज़ा पढा-लिखा हो तो ताउशुव
पु
की कौन बात है ! का, !
हुस्नआरा --चल भूंठे, सच-घच बता। नहों अब्छाह जानता है, खडे
खडे मिकलवोां दूंगी । ' 7
घसिपहआरा अपने दिल में सोचने गो कि हुम।यर्‌, फर ने बेवोर पीछा
किया । और फिर अब तो उनको ख़बर पहुँच,ही गई है तो फिर माली
+
बनने की क्या ज़रूरत हि
हुस्तशारा--खुदा गवाह है। सज़ा देने के क़ाबिल आदमी है। भछ-
मनसी के यह मानी नहीं हैं कि किसी के धर में साली या चार ' बनकर
घुसे । यह छीरा निकाल देने ऊ,यक हे । इसको कुछ चंटाया होगा, जभी
न प
फिसल पड़ा ।./ ;
माली के होश बड़ गए | बोला--हुजूर मालिक है | बीस बरस से
इस सरकार का नमछ खाता हूँ, भगर कोई कुप्तर गुलाम से नहीं हुआ।
, श्रब छुद्ापे मे हुजर यह दाग ने ऊंगाएं।। / «८ / ४
हुस्तआरा--कछ अपने भाज्जे को ज़रूर छाना ।
घिपड्आरा-अगर ऊुंस्र-हुआं हैतो सच-सच कह दे।. :
साली-हुजूर, भकूठ बोलने की तो मेरी' आ्द्त/ नहीं ।"
शाजाद-कथधा ८,
दूसरे दिल शहज़ादा ने माकी को फिर चुलवाया और कहा--अराज
एक यार झौर दिसा दौ। 6
* माली -हुजूर, ठे चलने में तो एुकास फो उम्र नहीं, मगर उरता हूँ कि
कहीं बुढ़ापे में दाग न लग जाय । ' शक ५
शहजादा-अनी वह मेकूफ कर देंगी.तो एम घीकर रख लेंगे ।
माली--सरकार,-में नी ऋरी को नहीं, इज्ज़त को उरता है । "
शहजादा-क्पा सदहीना पाते हो १3," ॥
माली-६ रुपए मिलते हैं हुज़ूर !
शहज़ादा--भाज से ६ रपए यहां से तुम्हारी जिन्द्‌गी-भर मिला करेंगे ।
क्यों, हमारे श्राने के बाद श्रोरततें कुछ नहीं कहती थीं १३
माली--शापस में कुछ बातें करती थीं, सगर में सुन नहों सझा।!
तोमेंशाम को आऊँगा ? , . '* ३
शहजादा--पुस उरो नहीं, तुम्दारा मुकखान नहीं होने पाएगात
' माली तो सलाम करके रवाना हुआ.भौर हुमायँ फर दुभा माँगने रूगे
क्रिकिसी तरह शाम हो। वारूबार कैमरे के बाहर जांते, बार-बार घड़ी की
तरफ देखते । सोचे, आओ ज़रा सो रहें । सोने में 'दक्त भी कद जग्गा
और बेकरारी भो कम हो जावेगी। छेटे; मयर बड़ी देर तक नींद न आई।
खाना खाने के व'द लेटे तो ऐसी नींद 'भाई कि शास हो गईं। उधर
सिपतनारा ने हीरा माली को अकेझ्े सें: बुलाकर डादनो शुरू' किया ।
दवीरा ने रोकर कहा--वादक अपने भाश्जे को छाया। “नहीं तो बह
लथाड़ क्थों,घुननी पहती । -. ०, ,।7। +/« |
सिपहआरा-ऊकुछ दीवाना हुआ है बुडठे ! तेरा साज्जा और इतना
सलीकेदार ! इतना हसीन।ी. +, *'*. ,. “४ गे
हीरा--हुजू , कगर मेरा भाउजा न हो तो नाक कटथ्वा डा ।' *
"८६ आज़ादन्कथा
“ सिपहआरा--(महरी से) ज़रा तृ इसे समझा दे कि अगर सच-सत
बतला दे तो कुछ इनाम दूँ । ।
महरी ने माली को श्रग 'ले जाकर समभ्काना शुरू किया--अरे मे
आदमी, बता दे । जो तेरा रत्ती-भर नुकसान हो तो सेरा जिम्मी । '
हीरा--इस बुढोती' में क्ंक का टीका लगवाना चाहती हो ? 7
महरी--अब मुभूसे तो बहुत उड़ो नहीं, शहजादा हुसायं फर के
सिया और किसी की इतनी हिम्मत नहीं हो सकती। बता, 'ये वही
क्िि नहीं? शी छ !
* हीरा-हाँ, आये तो वही थे । + पा
महरी-( सिपहदश्रारा से ) छीजिए ' 'हुज्लर, श्रव इसे इनाम
दीजिए । ; ।
घ्िपनन्नारा--अच्छा_होरा, श्राज जब वह श्राएं तो यह कागज दे
देना । हु '
इत्तिफाक से हुस्वआरा बेगम भी टदलती हुईं आ गईं। वह भो
दस्ती पर एक शेर लिख छाई थीं। 'सिपहभारा को देकर बोलीं--हीरा
से कह दो कि जिस वक्त हुमायूं फर भाएं, यह दफ्ती दिखा दे ।
“ ८“सिपहआरा-ऐ तो बाजी, जब हुमाश्न फर हों भी !
हुस्नश्रारा--कितनी साढी हो १ जब हो भी ?
, सिपहमारा--भच्छा, हुमाम फर ही' सही ! वह शेर तो सुनाझो ।
हुस्‍्नशारा--हमने यह लिखा है-- '
असीरे दिसे-व-शहवत हर कि शुद नाकाम ' मीबाशद,
दरीं आतश कसे गर पुझुता बाशद खाम मीवाशद |
(जो आदमी दि झोर शहवत में कैद दो गया, वह नाकाम रेद्ता
है । इस आग से अगर कोई पका भी' हो तो भी कच्चा रहता हैं ।)
आज़ाद-कथया ज्द७
हीरा ने कुझकर सछाम किया झौर शाम को हुमाप्नं फर के सकान
हुँचा ।
हुमायूं --झ्ा गए | अच्छा, 5हरों । आज बहुत सोए ।
हीरा--खुदावन्द, पहुत खफा हुई शोर कद्दा कि हम तुमको सौझूफ
र देंगे। है
हुमायू --तुम इपकी फिक्र न करो ।.
होता--हुूर, सुझे ध्राघ सेर घाटे से मतऊूय है ।

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