पहल बर सेक्स कैसे करे

जाते । बेगम ने घबराकर कहा--माछूम होता है शेर कठचरे से निकल
भागा है। कहाँ हैं दारोग्राजी, जरा उनको छुलाना तो !
* -बेममसाहब तो यहाँ सारे डर,के चीख रहो थीं, और उनसे थोड़ी ही
दूर पर वक्कीछसाहब ,ओर, सिर्यां सलाएबख्श सें तकरार हो रही थी--
चकील--ठक क्यों गया थे ? बाहर क्यों नहीं चलता ? क्‍
सलारबख्श-तो जाप ही श्रागे बह जाहएु न !
चंकील-तो अकेछे हम कैसे जा सकते है ?
सलारबख्श--यहद् क्यों ? क्‍या भेड़िया खा जावगा ? या पीठ पर
लादकर उठा छे जायगा, ऐसे दुबले-पतले भी .तो आप नहीं हैं! द्वाथी पर
बैठिए तो काँख दे | पु ५ ५ 0 '
धकीऊ--बगैर नौकर के जाना एमारी शान के ख़िलाफ़ है ।
,.. सलारबख्श--तो आपका नोकर कौन है ? हम तो इस चक्त मालिक
साकूम होते हैं। ० « :
चकीऊू-श्रच्छा,वाहर निकलकर इसकका जवाब दूँगा। देख तो सही !
आज्ञाद-कचा जुण३्‌
, सलारबफ्श--अज्ी, जायो सी, शव यहाँ ही-जवाब न दिया तो बाहर
क्या घनाश्नोगे ? क्षव छुपके हो रहिएु। माहक-बिन-नाहक को बात
चढ़ेगी । ग् |
चकीक--वस, हस इन्हीं बातों से तो खुश होते हैं। -
धलारबख्श--ख़ुदा सत्यमत खसख्ते हुजूर को । झापकी बदीछत - इस
भी दो गांठ हस-बोल लेते है। ५ हे ।
चकीछ--यार, किसी तरह इस सुरैयावेगम का पता तो लगाझ्नो कि
यह कौन हैं । शिव्योजान तो चक्रमा देकर चली गई, शायद यदह्दी निकाह
पर राजी हो जाये!
सलारबख्श--ज़रूर ! और खूबसूरत भी आप ऐसे ही हैं ।
सुरैयावेगम खुपके-छुपके ये बातें सुनती और दिल्‍क ही ,दिल सें
हँसती जाती थी । इतने में. एक खूबसूरत जवान नज़र पडा । छाथ-पाँव
साँचे के ढले हुए, मर्से भींगती हुईं, मिर्याँ आज़ाद से छूरत बिलकुछ
मिलती थी । सुरैयावेगम की आँखों में श्राँसू भर आाये। अब्बासी से
कद्ा--ज़री, दारोग़ाखाहव को घुडाओ । अब्बासी ने बाहर भाकर देखा
तो दारोग्रा साइब हुक्का पी रहे हैं। कह्ा--चलिए, नादिरी हुक्म है
कि श्रभी-अ्रभी चुला लाशो ! । न्‍
दारोग़ा--भच्छा-अच्छा ! घलते हैं। ऐसी सी क्या जल्दी है ! ज़रा
हुक्‍फ़ा तो पी लेने दो । घ +, नई + ्््ि
अव्यासी--अच्छा व चलिए, फिर हमको उलाहना न दीजिएगा !
हम जताए जाते हैं। ह ! मा
दारोग़ा--(हुक्का पटककर) चलो, छाह्वव चलो ]7 अच्छी नोकरी है
दिन-रात गुलांमी करो 'त्तव भी चेन नहीं। यह महीना ख़त्म हो - छे तो
हम अपने घर की राह लें । | हे कक ला को गुट «तो
ज्ज्ए आज़ाद-ऊथा
“दारोग़ाधाहथ जब सुरैयावेगम के पास पहुँचे(तो उन्होंने -अ्हिस्ता
ले कहा--वह जो कुर्सी पर एक , जवान काले कपड़े पहनकर बैठा . हुआ,
है । उसका नाम जाकर दुर्याफ्त करो । मगर आादुमियत से प्रछना,।' ' |
दारोगा-या खुदा, हुजूर बड़ी कड़ी चौऊंरी बोलीं | ,युलाम को ये
सब बातें याद क्‍्योंकर रहेंगी | जैवा हुक्म हो [07 7,
अब्यासी--ऐ, तो बातें कौन ऐसी लम्य्री-चौडी हैं जो थाद न रहेगी?
- दोरोग़ा--शअरे-भाई, हमसें तुम फ़ भी त्तोहे | तुम अभो सन्नह-
अंठारह वर्ष की दो झोर यहाँ विद्रकुछ सफ़ेद हो गये हैं।, सेर, हुज्लूर जाता हूँ ।
दारोग्रासाहब ने जवान के पास जाकर पछा तो माछूम .हुला कि ,
उनका नाम।मिर्या आज़ाद है । बेग पस्ताहब ने आज़ाद का नास सुत्रा तो
मारे खुशी के भांखों में. आज भर आये । दारोगा को हुक्म: दिया,.जाकर
पृछ श्रॉश्रो, अरारंखी- की भी आप जानते हैं? श्ाज नमक का हक
श्रदा करो । किप्ती तरकीब से इनको मकान! तक लामो । 2 '
४ द्वारोगासाइव समर गये। कि इस जवान पर बीवी का 'दिझ भा
गया:। अब खुदा ही खेर'करे । अगर अलारक्खी-का 'ज़िक छेड़ा ओर ये
बिसड़ गये तो बड़ी किरकिरी होगी । और अगर न जाऊँ तो यह विकाल--
बाहर करेंगी । चले, पर हर कृदम पर सोचते जाते थे कि. न-जाने क्या
ब्राफत आये। जाकर जवान, के पास एफ कुर्सी पर बैठ गये और घोले--
एक भरज्ज है, हुजूर, मगर शर्त यद्द है कि आप खफा न द्वी ॥ै सवाल के
जवाब में/सि् हाँ/याँ नहीं? कह दे 77 5 7 /75 चए, --
जवान--बहुत खूब ! हाँ? कहूँगा या 'नहीं!। ॥ 4 «75 ४
; दारोगरा--हुजूर का गुलाम है। 6: 5 शा 2
७ जेवार्न--अजी, श्राप हतनाईदसरार क्यों ,करते हैं, झापको जो-कुछ
कहना हो कहिए । मैं बुरा न सानू गा। , (5 +क बढ 7 है ५
आाज़ाद-कथा जजप
दारोगा--एक ब्रेगमसाहब पछती हैं, कि हुजुर अलारक्खी के “नाम
से चाकिफ हैं हक हज
वान--बस, इतनी ही बात ! अकारक्खी को मैं खूब जानता हूँ ।
मगर यह किसने पूछा है ? जम आप
दारोगा->कल सुबद को आप जहाँ कहें, वहाँ आ जाऊँ। सय -बातें
तय हो जायेगी ।।. * ४ 7 2 आम,
जवान--ह ज़तत, कछ तह की खबर न लोजिए वरना आ्राज रात'को
सुमे नींद न श्राएी ॥ * * ह/8३, +४ 6
दारोगा-ने जाकर वेगमपाहव से कहा--हुज़ूर, वह तो इसी चक्त
आने कहते हैं | वया कह दूँ ? बेगम बोलीं--कह दी, जरूर साथ चले |
उध्ती जगद्द एक नवाबधाहव अपने सुधाहवों के साथ बैठे तम्तार्शा
देख रहे थे । नवाब ने फ़रमाया--क्ष्यों ,मियाँ नत्य, यह कक्‍्यी बात
निकाली है-कि जिस जानवर को देखो वस में झा गया । अक्छ काम नहीं
करती । हक तक हु
नत्य-- खुदावन्द, बल बात सारी यह है,कि ये छोग अरल के;पुतले
है। दुनिया के परदे पर कोईं ऐसी-चीज़ नहीं जिसका इल्प: इनके, यहाँ न
हो | चिड़िया का इृम इनके यहाँ, हल चछाने का इत्म इनके थहाँ, गांने-
बजाने,का इष् इनके यहाँ। क़रू जो बारहदरी की, तरफ़ से होकर गुज़रा
तो देखा, बहुतसे भादमी जमा हैं। इतने में श्गरेज़ी. बाजा बजने छर्गा
वो हुज्ूर जो गोरे बाजा 'बजाते थे, उतके सामने एक-एक किताब )/खुली
हुई थी । मगर व, घोतू घोंतू ! इसके सिद्रा कोई ' बोल ही सुनने “में
नहीं आया । ५
प्रिरज़ा>*हुज़ूर ऊे' सघाछ को जवाब तो दो ! हुज़र पछते है कि
जानवरों को बस में क्‍यों कर छाए १. *+ « 27 7 % पल

जज आंजाद-कथा
: “'नत्यू--कहा न कि इसके यहाँ हर बाते का इण्म है ।'इल्मं के ज़ोर से
देखा होगा कि कौन जानवर किस वीज़ पर आशिक है। बस, वही
चीज़ मुहैया कर छी। . /. /+. | + -४*४*
नवाघ--तसहछी नहीं:हुईं | कोई ख़ास चजद् ज़रूर है। .
£/ नत्यू--हुजूर, हिन्दोस्तान का नट भी वह काम करता है जो किसी
' और से नहो सके। बाँस गाड़ दिया, ऊपर चढ़ गया और अंगूठे के
ज़ोर से खड़ा हो गया ।! ४ पट
मिरज़ा--हुजूर, पुलाम ने पत्ता छया लिया। जो कभी भूठ निकले
तो नाक कटवा ढाहूँ | बस, हम समझ गए । हुजूर, श्राज तक कोई बडे

  • फिक्शनमेनिया
  • हिंदी में गर्म भारतीय सेक्स
  • जबरदस्त सेक्स करते हुए
  • सेक्स करते वडय दखएं सेक्स
  • पूरा शरीर ओगाज़्म
  • कैटरन कैफ सेक्स करते हुए
  • सेक्स न करने के फयदे
  • फिक्शनमेनिया
  • सेक्स करते वडय दखएं सेक्स
  • लेक्सी स्टोन अश्लील
  • हॉटवेटट्यूब
  • सेक्स के साथ चूसने स्तन
  • बफ सेक्स करने वल
  • पूरा शरीर ओगाज़्म
  • समलैंगिक अश्लील
    सेक्स करते हुए बतइए हंद में
    फिक्शनमेनिया
    फिक्शनमेनिया
    हिंदी में गर्म भारतीय सेक्स
    हिंदी में गर्म भारतीय सेक्स
    लोमड़ी सौतेली बहन
    हंद में सेक्स करते हुए वडय दखइए
    सेक्स करते टइम
  • लेक्सी स्टोन अश्लील
  • हॉटवेटट्यूब
  • एक्स अश्लील
  • मैकडॉर्सेल
  • कैटरन कैफ सेक्स करते हुए
  • सेक्स न करने के फयदे
  • सनी लियोन
    लड़कियों के साथ सेक्स
    सेक्स करते समय लड़क क
    लेक्सी स्टोन अश्लील
    लड़कियों के साथ सेक्स
    कैटरन कैफ सेक्स करते हुए
    सेक्स करते टइम
    ऑनलइन सेक्स करते हुए
    फिक्शनमेनिया